कथन
Hon. Madam, I rise with great pride to speak on the Demand for Grants of the Ministry of Agriculture and Farmers ….. English translation of this part of Speech was originally delivered in Odia. 18.03.2026 1496 Welfare for 2026-2027. … (Interruptions) I must begin by acknowledging the visionary leadership of our hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi ji and the commitment of our hon. Agriculture Minister, Shri Shivraj Singh Chouhan ji towards strengthening India’s agriculture sector. … (Interruptions) Over the past decade, India’s food grains production has increased by nearly 44 per cent. … (Interruptions) At the same time, the Government is moving towards creating digital identities for nearly 11 crore farmers ensuring that every farmer became visible in the system and every entitlement reaches its rightful beneficiary. … (Interruptions) 16.00 hrs Further, under the Viksit Krishi Sankalp Abhiyan, 2,170 teams of scientists engaged directly with over 1.34 crore farmers across 1.42 lakh villages, taking research, innovation and scientific guidance directly to the farmers’ doorstep. … (Interruptions) Coming to the budget, the total allocation of Rs. 1,40,529 crore, a 5.4 per cent increase over last year, reflects the Government's continued commitment to agriculture.… (Interruptions) The allocation of Rs. 63,500 crore under PM-KISAN, benefitting more than 10 crore farmer families, continues to provide direct and dignified income support. … (Interruptions) I also warmly welcome the creation of the fund for innovation and adoption of technology to support initiatives such as YES-TECH and WINDS. 18.03.2026 1497 … (Interruptions) Technology must become the new ally of the Indian farmer, and this Government is steadily making that transition possible. However today I wish to speak for those farmers whom policies often mention but systems sometimes fail to reach - our small, marginal and tenant farmers. … (Interruptions) Across India, millions cultivate land they do not formally own, yet they remain excluded from schemes such as PM-KISAN due to land ownership requirements. They feed the nation, but too often remain invisible in the system. In this context, I would like to acknowledge my Party President, Shri Pawan Kalyan Garu, who has long been a steadfast voice for tenant farmers. At a time when their distress was being overlooked by the previous Government in the State, and suicides among tenant farmers were rising, he did not remain a silent spectator. He personally reached out to grieving families and committed Rs. 30 crore from his own earnings, providing Rs. 1 lakh each to the families of nearly 3,000 tenant farmers who had taken their lives. This was not politics, this was humanity. I also commend this Government for extending the Kisan Credit Card scheme to tenant farmers and oral lessees, a progressive and inclusive step. However, on the ground, most banks continue to insist on land ownership documents before sanctioning a KCC. A tenant farmer does not own the land title. So, despite the policy 18.03.2026 1498 existing on paper, lakhs of tenant farmers continue to be turned away at bank counters. 16.02 hrs At this stage, Shri Rajesh Ranjan, Shri Hanuman Beniwal, Shri Abdul Rashid Sheikh, Adv. Chandra Shekhar came and stood on the floor near the Table. I therefore urge the Government to issue clear guidelines directing banks not to reject KCC applications solely on the ground of absence of land title. … (Interruptions) More fundamentally, I strongly urge the Government to create a Tenant Farmer ID linked to the Agri Stack and the Digital Farmer ID initiative currently being rolled out. … (Interruptions) If we can digitally identify 11 crore farmers, surely we can identify those who cultivate land without owning it. A Tenant Farmer ID verified at the village and panchayat level could bring millions of invisible cultivators into the formal system and making them eligible for KCC, PM-KISAN, crop insurance, and every entitlement they deserve. … (Interruptions) The farmer who owns the land and the farmer who tills the land must both be seen by this Government. … (Interruptions) I also welcome the allocation of Rs. 210 crore for strengthening Krishi Vigyan Kendras. … (Interruptions) However, there is a specific gap that needs attention. … (Interruptions) Andhra Pradesh has 24 KVKs, yet post-bifurcation the district of Kakinada, one of the most productive regions in the Godavari delta, known for paddy cultivation and seafood exports, does not have a single KVK. … (Interruptions) I have written to the hon. Minister on this matter and I 18.03.2026 1499 once again urge the Government to sanction a Krishi Vigyan Kendra for Kakinada at the earliest. … (Interruptions) I wholeheartedly support these Demands for Grants. With these few suggestions, I urge the Ministry to ensure that its policies reach the smallest field and the most marginalised cultivator. एडवोकेट गोवाल कागडा पाडवी (नÆदुरबार) : म§ आज इस सदन म¤ कृिष एवं िकसान कÐयाण मंýालय कì अनुपूरक अनुदान कì मांगŌ पर अपने िवचार रखता हóँ । यह केवल बजट कì तकनीकì ÿिøया नहé है । यह देश के करोड़Ō िकसानŌ के जीवन, उनकì आय, उनके सÌमान और उनके भिवÕय से जुड़ा हòआ िवषय है । जब हम कृिष के बजट पर चचाª करते ह§, तो हम¤ यह याद रखना चािहए िक यह उन लोगŌ का ÿij है जो इस देश को भोजन देते ह§, लेिकन अ³सर Öवयं आिथªक असुर±ा म¤ जीवन जीते ह§ । सबसे पहले म§ सरकार से यह पूछना चाहता हóँ िक यिद कृिष और िकसान वाÖतव म¤ सरकार कì सवō¸च ÿाथिमकता ह§, तो िफर मूल बजट म¤ पयाªĮ ÿावधान ³यŌ नहé िकया गया । जब सरकार को वषª के बीच म¤ अितåरĉ धन कì आवÔयकता पड़ती है, तो यह इस बात का संकेत होता है िक ÿारंिभक बजट योजना अधूरी थी या वाÖतिवक जłरतŌ का सही आकलन नहé िकया गया था । िव°ीय वषª 2025-26 म¤ कृिष और िकसान कÐयाण मंýालय का बजट लगभग ₹1.27 लाख करोड़ के आसपास रखा गया था । इसम¤ से सबसे बड़ा िहÖसा ÿधानमंýी िकसान सÌमान िनिध (PM-KISAN) के िलए लगभग ₹60,000 करोड़ का था । इसका अथª यह है िक कुल कृिष बजट का लगभग आधा िहÖसा केवल एक नकद सहायता योजना पर खचª हो रहा है, जबिक िसंचाई, अनुसंधान, भंडारण, बाजार ÓयवÖथा और कृिष अवसंरचना जैसे दीघªकािलक िनवेशŌ के िलए अपे±ाकृत कम संसाधन उपलÊध ह§ । Speech was laid on the Table. 18.03.2026 1500 PM-KISAN योजना कì वाÖतिवकता सरकार बार-बार PM-KISAN योजना का उÐलेख करती है । इस योजना के अंतगªत िकसानŌ को ₹6,000 ÿित वषª कì सहायता दी जाती है । हम¤ स¸चाई को Öवीकार करना होगा । ₹6,000 वषª भर म¤, अथाªत लगभग ₹500 ÿित माह । आज एक िकसान के िलए केवल एक बोरी उवªरक कì कìमत ही कई बार ₹1,200 से ₹1,500 के बीच होती है । डीज़ल कì कìमत, मजदूरी, बीज और कìटनाशक का खचª लगातार बढ़ रहा है । ऐसे म¤ ₹500 ÿितमाह कì सहायता िकसानŌ के िलए वाÖतिवक राहत नहé बन सकती । इसके अलावा, आिदवासी ±ेýŌ म¤ एक बड़ी समÖया यह है िक कई िकसानŌ के पास भूिम के औपचाåरक åरकॉडª नहé है । उदाहरण के िलए, नंदुरबार जैसे िजलŌ म¤ हजारŌ िकसान वन अिधकार अिधिनयम के तहत भूिम पर खेती करते ह§, लेिकन भूिम के दÖतावेज लंिबत होने के कारण वे PM- KISAN जैसी योजनाओं से बाहर रह जाते ह§ । इसिलए सवाल यह उठता है िक ³या सरकार इस योजना कì रािश बढ़ाने और पाýता को Óयापक बनाने पर िवचार करेगी । कृिष बीमा योजना और िकसानŌ कì िशकायत¤ सरकार ÿधानमंýी फसल बीमा योजना (PMFBY) को िकसानŌ के िलए सुर±ा कवच बताती है । इस योजना के िलए क¤þ और राºय सरकार¤ हर वषª हजारŌ करोड़ Łपये कì सिÊसडी देती ह§ । िकसानŌ कì वाÖतिवक िशकायत¤ अलग ह§ । कई राºयŌ म¤ िकसानŌ को बीमा का भुगतान महीनŌ तक नहé िमलता । कई मामलŌ म¤ फसल का नुकसान लाखŌ Łपये का होता है और मुआवजा कुछ हजार Łपये िमलता है । िकसानŌ का यह भी आरोप है िक बीमा कंपिनयŌ को ÿीिमयम से बड़ा लाभ िमलता है, जबिक िकसानŌ को पयाªĮ सुर±ा नहé िमलती । Æयूनतम समथªन मूÐय और वाÖतिवक खरीद Æयूनतम समथªन मूÐय (MSP) िकसानŌ के िलए एक महÂवपूणª सुर±ा तंý है । लेिकन MSP तभी ÿभावी होता है जब सरकार वाÖतव म¤ फसल कì खरीद करे । वाÖतिवकता यह है िक देश म¤ MSP पर खरीद मु´य łप से कुछ राºयŌ और कुछ फसलŌ तक सीिमत है, जैसे गेहóं और 18.03.2026 1501 धान । आिदवासी ±ेýŌ म¤ िकसान अवसर िमलेट, दाल¤ और अÆय फसल¤ उगाते ह§ । लेिकन इन फसलŌ कì सरकारी खरीद सीिमत होने के कारण उÆह¤ MSP का लाभ नहé िमल पाता । कृिष बजट का GDP म¤ घटता िहÖसा एक गंभीर िचंता यह भी है िक कृिष ±ेý का महÂव बहòत बड़ा होने के बावजूद कृिष पर सावªजिनक िनवेश का िहÖसा सीिमत है । भारत कì लगभग 45 ÿितशत कायªवल अभी भी कृिष पर िनभªर है, लेिकन कृिष ±ेý का GDP म¤ योगदान लगभग 16-17 ÿितशत के आसपास है । इसका अथª है िक करोड़Ō लोग कम आय वाले ±ेý म¤ काम कर रहे ह§ । यिद हम कृिष म¤ िनवेश नहé बढ़ाएंगे, तो िकसानŌ कì आय बढ़ाना संभव नहé होगा । UPA और NDA के बीच तुलना इस सदन म¤ यह तुलना करना आवÔयक है िक अलग-अलग सरकारŌ के दौरान कृिष नीित कैसी रही । संयुĉ ÿगितशील गठबंधन (UPA) सरकार के समय कई महÂवपूणª कदम उठाए गए थे । उस समय Æयूनतम समथªन मूÐय म¤ उÐलेखनीय वृिĦ कì गई थी । कई फसलŌ के MSP म¤ 90 ÿितशत से अिधक वृिĦ हòई थी । इससे िकसानŌ को उनकì फसल का बेहतर मूÐय िमला । इसके अलावा राÕůीय खाī सुर±ा िमशन, राÕůीय कृिष िवकास योजना (RKVY) और कृिष ऋण माफì योजना जैसे कायªøमŌ ने िकसानŌ को राहत दी । आज िकसानŌ को यह महसूस होता है िक नीितयŌ म¤ घोषणाएँ तो बहòत ह§, लेिकन जमीनी Öतर पर पåरवतªन उतना िदखाई नहé देता । जलवायु पåरवतªन और वषाª आधाåरत खेती भारत कì लगभग 50 ÿितशत कृिष भूिम अभी भी वषाª पर िनभªर है । यिद मानसून कमजोर हो जाए तो पूरी फसल ÿभािवत हो जाती है । नंदुरबार जैसे िजलŌ म¤ िकसान मु´य łप से वषाª आधाåरत खेती करते ह§ । यिद वषाª समय पर नहé होती, तो उनकì पूरी आय ÿभािवत हो जाती है । इसिलए िसंचाई, जल ÿबंधन और जल संर±ण पर अिधक िनवेश कì आवÔयकता है । कृिष अवसंरचना कì कमी भारत म¤ अभी भी िकसानŌ को अपनी फसल बेचने म¤ कई किठनाइयŌ का सामना करना 18.03.2026 1502 पड़ता है । भंडारण सुिवधाओं कì कमी के कारण बड़ी माýा म¤ फसल खराब हो जाती है । कृिष िवशेष²Ō का अनुमान है िक भारत म¤ पोÖट-हाव¥Öट लॉस लगभग 15-20 ÿितशत तक हो सकता है । यिद भंडारण और ÿसंÖकरण सुिवधाएँ बेहतर हŌ, तो िकसानŌ कì आय Öवतः बढ़ सकती है । िकसानŌ कì आय और सामािजक सÌमान अंततः हम¤ यह Öवीकार करना होगा िक कृिष केवल उÂपादन का िवषय नहé है । यह सÌमान का भी िवषय है । जब एक िकसान पूरे वषª मेहनत करता है और अंत म¤ उसे उिचत मूÐय नहé िमलता, तो उसके मन म¤ िनराशा पैदा होती है । एक शायर ने कहा है- "िजस खेत से दहकŌ को मयÖसर न हो रोटी, उस खेत के हर खुशा-ए-गंदुम को जला दो ।" यह पंिĉ केवल किवता नहé है; यह उस पीड़ा को Óयĉ करती है जो आज भी देश के अनेक िकसानŌ के िदल म¤ है । अंितम िनवेदन म§ सरकार से यह आúह करता हóँ िक कृिष को केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीिमत न रखा जाए । यिद वाÖतव म¤ िकसानŌ कì आय बढ़ानी है, तो कृिष म¤ िनवेश बढ़ाना होगा, िसंचाई और अवसंरचना को मजबूत करना होगा, और MSP ÓयवÖथा को अिधक ÿभावी बनाना होगा, ³यŌिक जब िकसान मजबूत होगा, तभी भारत मजबूत होगा । "जब िकसान कì मेहनत को सÌमान िमलेगा, तभी भारत का भिवÕय वाÖतव म¤ उººवल बनेगा ।" 18.03.2026 1503 ®ी िवशालदादा ÿकाशबापू पाटील (सांगली) : इस चचाª कì शुŁआत म§ M. S. Swaminathan जी के शÊदŌ से करना चाहता हóँ -"कृिष ±ेý भारत कì बुिनयाद है । इसकì र±ा करना हमारा कतªÓय है ।" आज सबसे बड़ा सवाल ये बन चुका है िक ³या सरकार ने अपना कतªÓय िनभाया या केवल झूठे वादे िकये? ³या सरकार ने इस बुिनयाद को मजबूत िकया, या उसे धीरे- धीरे कमजोर कर िदया? सरकार का एक वादा था "2022 तक िकसानŌ कì आय दोगुनी करना", लेिकन हकìकत ³या है? ³या सरकार आंकड़े जारी करने कì जहमत उठाएगी, कì स¸ची सामने आए? यह जानकर बेहद िनराशा होती है िक अिधकांश भारतीय िकसानŌ के िलए costs उनकì income से कहé अिधक तेज़ी से बढ़ रही है । Input costs म¤ वृिĦ के कारण profit margins म¤ िगरावट आ रही है, और rural consumer inflation म¤ वृिĦ के साथ, िकसान आिथªक łप से बेहद नाजुक िÖथित म¤ ह§ । CACP के आंकड़Ō के अनुसार, 10 म¤ से 7 major crops म¤ farm income म¤ वृिĦ inflation दर से कम रही है । यिद हम िपछले 10 वषŎ कì तुलना कर¤ तो – Paddy म¤ profit margin 58% से घटकर 49.3% हो गया है । Wheat म¤ भी profit margin 123% से घटकर 103% हो गया है । Sugarcane कì बात कर¤ तो यहां भी profit margin 151% से घटकर 102% हो गया है । फल और सिÊजयŌ कì िÖथित तो और भी बदतर है । RBI के सव¥±ण के अनुसार फल और सिÊजयŌ म¤ िकसानŌ का िहÖसा कम और ÓयापाåरयŌ का मुनाफा अिधक होता है । औसतन, अगर 100 Łपये का िबकता है, तो िकसान को लगभग 48 Łपये ही िमलते ह§ । एक ओर कहते ह§ "doubling incomes" दूसरी ओर, सरकार िकसानŌ कì आय दोगुनी न होने देने के िलए अपनी मनमजê से Export Bans लगाती है । जैसे ही global prices के कारण िकसानŌ को वाÖतव म¤ कमाई का अवसर िमलता है । सरकार अ³सर सबसे पहले िनयाªत पर Speech was laid on the Table. 18.03.2026 1504 ÿितबंध लगा देती है । सरकार िकसानŌ को लागत म¤ सहायता के िलए ÿित वषª 6000 Łपये देती है (Rs.2000 three times a year) लेिकन ³या यह वाÖतव म¤ मददगार है । 2019 म¤ योजना शुł होने के बाद से रािश म¤ कोई संशोधन नहé िकया गया है और इससे भी बुरी बात यह है िक तब से सभी imput costs बढ़ गई है । िपछले दशक म¤ fertiliser (DAP) कì लागत दोगुनी से अिधक हो गई है । बीजŌ कì लागत दोगुनी हो गई है, ®म लागत दोगुनी हो लागत म¤ काफì वृिĦ हòई है । ऐसे म¤ सरकार यह कैसे सोच सकती है िक माý 2000 Łपये दोगुनी हो गई है, ईंधन कì कì िकÖत से कुछ भी कवर हो पाएगा' यह देश के िकसानŌ के साथ एक िघनौना मजाक है । सरकार "आÂमिनभªर भारत कì बात करते ह§ लेिकन िकसान "आÂमहÂया के िलए मजबूर है । कई वषŎ कì िगरावट के बाद, 2023 म¤ ÿवृि° तेजी से उलट गई । देश म¤ 10,786 िकसानŌ कì आÂमहÂयाएं दजª कì गई जो 2022 कì तुलना म¤ 75% से अिधक कì वृिĦ है । महाराÕů के िकसान सबसे ºयादा ÿभािवत ह§ ³यŌिक वहां आÂमहÂया के मामले सबसे अिधक है । ³या िकसानŌ कì आय दोगुनी हòई है? या िफर िकसानŌ का कजª, उनकì लागत और उनकì आÂमहÂयाएं ही दोगुनी हòई ह§? हमारी आंखŌ के सामने घिटत हो रही एक और बड़ी आपदा extreme weather events कì घटनाओं के कारण फसलŌ का िवनाश है । सूखा, रĉąाव और बेमौसम बाåरश अब कोई अपवाद नहé रह रहा, ये हर मौसम का खतरा सचाई बन गए ह§ । महाराÕů म¤ िपछले वषª, भारी बाåरश के कारण कृिष ±ेý म¤ Óयापक नुकसान हòआ है. म¤ लगभग 68.69 lakh hectares भूिम पर फसल¤ बरबाद हो जैसे िसंचाई उपकरणŌ को भी बहा िदया है िजससे कई िकसान खेती दोबार हो गई ह§ । बाढ़ ने िबजली के पंप असमथª हो गए ह§ । दोबारा शुł करने म¤ िकसानŌ के िलए इस किठन समय म¤, जब क¤þ सरकार का कतªÓय था िक वह उनकì मदद कर¤, िकसानŌ को बदले म¤ ³या िमला? फसल बीमा योजना के िलए budget allocation आठ साल म¤ सबसे कम कर दी गई है । Doubling Farmers Income Committee (2018) के मुतािबक 2014-15 म¤ कुल 18.03.2026 1505 फसल ±ेý (GCA) का िसफª 20% बीिमत था । सरकार का लàय 2019 तक 50% तक बढ़ाना था । लेिकन 2022 म¤ crop insurance schemes (PMFBY and RWBCIS) के तहत माý 28% (621 लाख हे³टेयर) बीिमत हòआ । ³या सरकार इस लàय को भूल गई है? Insurance claims paid to farmers म¤ भारी िगरावट आई है-2018-19 म¤ यह रािश 29.444 66 करोड़ Łपये थी, जो 2023-24 म¤ घटकर 10,391.39 करोड़ Łपये रह गई । 2025 म¤ घटकर केवल 576 करोड़ Łपये रह गई है । अपने कतªÓय का पालन करने के बजाय, सरकार ने भारतीय िकसानŌ के साथ घोटाला िकया है । सरकार ने केवल झूठे वादे िकए ह§ और िकसानŌ को उनके हाल पर छोड़ िदया है । West Asian conflict ने भारत के फल-सÊजी िनयाªत को तबाह कर िदया । मुंबई के JNPT पर 1,000 कंटेनर केला, अंगूर, Èयाज, तरबूज फंसे सड़ रहे, और महाराÕů के हमारे िकसान इसका खािमयाजा भुगत रहे ह§ । सांगली के िकसान भुगत रहे ह§ काले अंगूर 185 से 110 Łपये, हरे 135 से 90 Łपये िकलो' इसी तरह सोलापुर ±ेý के केले के िकसानŌ को भी समÖयाओं का सामना करना पड़ रहा है. िनयाªत मूÐय 19-24 Łपये ÿित िकलो से िगरकर 9-10 Łपये! नािसक का Èयाज - िनयाªत बंद ताª दाम 14-16 से 11-13 Łपये । तरबूज 25 से 14 Łपये िकलो! ³या सरकार ने इस मुĥे पर Åयान िदया है? नुकसान झेल रहे ऐसे िकसानŌ को अब तक कोई सहायता ³यŌ नहé दी गई है? अंत म¤, म§ अपने िनवाªचन ±ेý, Sangli, के िलए कुछ मांग¤ उठाना चाहóंगा । Under the The Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) Subsidy should be made available for grape cultivation under the Area Expansion component. Need to allocate additional funds to augment production and productivity for grapes under the Mission for Integrated Development for Horticulture. Need to allocate additional funds for Human Resource Development of 18.03.2026 1506 farmers, entrepreneurs, field level workers and officers in horticulture. Need to allocate additional funds for the creation of wholesale market infrastructure, cold chain infrastructure and horticulture mechanisation for grapes under the Mission for Integrated Development for Horticulture. Additionally, there is a need for a financial assistance package for the grape farmers whose shipments are stuck and are facing losses. Thank you ®ी नवीन िजंदल (कुٱेý) : म§ आपको धÆयवाद देता हóं िक आज आपने मुझे कृिष और िकसान कÐयाण मंýालय कì अनुदानŌ कì मांग, 2026-27 पर हो रही चचाª म¤ अपनी बात रखने का अवसर िदया । सवªÿथम, म§ हमारे यशÖवी ÿधानमंýी, आदरणीय नर¤þ मोदी जी और हमारे कृिष मंýी ®ी िशवराज िसंह चौहान जी को बधाई दूंगा िक आज उनके नेतृÂव म¤ 1 लाख 40 हज़ार करोड़ का कृिष बजट आवंिटत िकया गया है, िजससे हमारे देश के िकसानŌ को लाभ िमलेगा । "कृिषधªÆया कृिषम¥Åया जÆतूनां जीवनं कृिषः" । यह Ĵोक कृिष के महÂव को दशाªता है । इसका अथª है िक कृिष धÆय है, कृिष पिवý है और कृिष ही ÿािणयŌ का जीवन है । देश म¤ हमारे िकसान एक 'unifying force' भी ह§, िजनकì िज़Ìमेदारी सरकार कì भी है और िवप± कì भी । हम सभी िकसानŌ के िहत के िलए ÿयासरत ह§ और इसम¤ वैचाåरक मतभेद हो सकता है, लेिकन िकसानŌ का िहत और िवकास हम सबकì ÿाथिमकता है ³यŌिक इस िकसान कì उपज ही हम सब खाते ह§ । जब िकसान यह नहé सोचता िक उसकì फसल भाजपा वाले को जा रही है या कांúेस वाले को, तो उसके िवकास के संबंध म¤ हमारी भी एक आम सहमित होनी चािहए िक िकस ÿकार हम 'extreme prioritization' कì 'strategy' के साथ उन िवषयŌ पर अपना Åयान क¤िþत कर¤ िजससे कृिष को एक मुनाफे का काम बनाया जा सके । िकसान का बेटा होना मेरे िलए िसफª एक पहचान नहé, बिÐक मेरा गौरव है । मेरे िपता, Speech was laid on the Table. 18.03.2026 1507 Öवगêय ओ.पी. िजंदल जी ने मुझे बचपन म¤ ही िसखाया िक जो खेतŌ म¤ मेहनत करता है, वही असली भारत का िनमाªण करता है । म§ आज जहाँ भी हóँ, उसके पीछे खेतŌ म¤ बहाया हòआ पसीना और संघषª कì सीख है । चाहे उīोग हो या राजनीित, म§ने अपने िपता से सीखा िक हर काम को उसी मेहनत और ईमानदारी से करना चािहए, जैसे एक िकसान अपने खेत म¤ करता है । मेरे िपताजी ने खेतŌ म¤ खुद हल चलाया, िमĘी म¤ पसीना बहाया और हम¤ यह िसखाया िक कोई भी काम छोटा नहé होता । आज भी जब म§ िकसान भाइयŌ से िमलता हóँ, तो उनकì मेहनत और संघषª म¤ खुद को देखता हóँ, ³यŌिक म§ भी उसी िमĘी का िहÖसा हóँ । B. Union Budget Announcement म§ क¤þीय बजट 2026-27 म¤ कृिष से संबंिधत घोषणाओं का Öवागत करता हóँ और अनुदान मांग का पूणª समथªन करता हóँ । इस बजट म¤ बहòत सारी महÂवपूणª योजनाओं कì घोषणा हòई है । बजट म¤ productivity म¤ सुधार के िलए 'coconut promotion scheme' के साथ-साथ काजू और कोको के िवकास के िलए 'dedicated programmes' शािमल ह§ । केरल, गोवा, तटीय कनाªटक या ओिडशा के िहÖसŌ के िकसानŌ के िलए, इसका मतलब है 'lower-return' वाली फसलŌ से हटकर plantation-based खेती कì ओर बढ़ना, जो processing, exports और 'long-term income stability' का समथªन करती है । बजट म¤ orchard rejuvenation और 'high-density farming' के माÅयम से premium nut cultivation जैसे अखरोट, बादाम और पाइन नट्स पर जोर िदया गया है । ये फसल¤ भारत के healthy और protein-rich foods के बढ़ते बाजार म¤ तेजी से मूÐयवान हो रही ह§ । बजट संकेत देता है िक खेती का भिवÕय ²ान और 'technology' से तय होगा । सरकार ने Rs 150 crore 'Bharat-VISTAAR' को आवंिटत िकए ह§, िजसका उĥेÔय ICAR के best practices को 'AI-enabled advisory systems' और 'AgriStack framework' के साथ integrate करना है । इससे िकसानŌ को real-time guidance िमलेगा सही फसल चुनने से लेकर pest management, yields बढ़ाने और उपज को markets से जोड़ने तक । इसकì सफलता इस बात पर िनभªर करेगी िक ये systems úामीण 18.03.2026 1508 और remote regions म¤ िकतनी ÿभावी ढंग से पहòँचते ह§ । यह बजट एक 'transition' (बदलाव) का संकेत है: Traditional farming से diversified livelihoods कì ओर । Low-return staples से high-value crops कì ओर । Fragmented markets से organised value chains कì ओर । Survival farming से rural entrepreneurship कì ओर । Achievements of Government हमारी सरकार ने इस बजट से उस याýा को आगे बढ़ाया है जो िपछले 11 साल से चल रही है । कृिष और िकसान कÐयाण िवभाग के बजट अनुमानŌ म¤ लगभग पाँच गुना वृिĦ देखी गई है, जो 2013-14 के ₹27,663 करोड़ से बढ़कर 2026-27 म¤ ₹1,40,528 करोड़ हो गई है । भारत का कुल खाīाÆन उÂपादन 2014-15 के 265.05 million tonnes से बढ़कर 2024-25 म¤ अनुमािनत 347.44 million tonnes हो गया है । इन ÿमुख फसलŌ म¤ चावल, गेहóं, ºवार, बाजरा, म³का, रागी, जौ, चना, अरहर, दाल¤, मूंगफली, सोयाबीन, रेपसीड व सरसŌ, ितलहन, गÆना, कपास, और जूट शािमल ह§ । 2014-15 से 2024-25 के दौरान 14 खरीफ फसलŌ कì खरीद 7,871 Lakh Metric Tonnes (LMT) रही, जबिक 2004-05 से 2013-14 के बीच यह 4,679 LMT थी । गेहóं कì MSP 2013-14 के ₹1,400 ÿित ि³वंटल से बढ़कर 2024-25 म¤ ₹2,425 ÿित ि³वंटल हो गई । 2014-2024 के दौरान गेहóं के िलए MSP भुगतान के łप म¤ ₹6.04 लाख करोड़ िवतåरत िकए गए, जो 2004-2014 के ₹2.27 लाख करोड़ से बहòत अिधक है । धान कì MSP 2013-14 के ₹1,310 से बढ़कर 2025-26 म¤ ₹2,369 ÿित ि³वंटल हो गई । Grade-A धान कì MSP ₹1,345 से बढ़कर ₹2,389 ÿित ि³वंटल हो गई । 2014-15 और 2024-25 के बीच धान कì खरीद 7,608 LMT तक पहòंच गई, जो िपछले दशक म¤ 4,590 LMT थी । 18.03.2026 1509 धान िकसानŌ को MSP रािश 2014-25 के दौरान ₹14.16 लाख करोड़ दी गई, जो 2004-14 के ₹4.44 लाख करोड़ से अिधक है । MSP पर दालŌ कì खरीद म¤ 7,350% कì भारी वृिĦ देखी गई, जो 2009-2014 के 1.52 LMT से बढ़कर 2020-2025 के दौरान 82.98 LMT हो गई । ितलहन खरीद म¤ िपछले μयारह वषŎ म¤ 1,500% से अिधक कì वृिĦ हòई । D. Natural Farming इन तमाम उपलिÊधयŌ के बीच एक बहòत बड़ी चुनौती है, िजस पर म§ इस सदन का Åयान आकिषªत करना चाहता हóँ और वह है 'Natural Farming' (ÿाकृितक खेती) । अ³सर लोग Natural Farming और Organic Farming के बीच 'confuse' हो जाते ह§ । लेिकन म§ ÖपĶ करना चाहता हóँ िक हम¤ ÿाकृितक खेती पर अिधक 'focus' करना चािहए, ³यŌिक यह केवल खेती का एक तरीका नहé, बिÐक हमारे कृिष ±ेý को बचाने का एक 'sustainable' समाधान है । कोई भी Human civilisation एक ही सरल नéव पर िटकì होती है-ÖवÖथ और पौिĶक भोजन उगाने कì ±मता । आज वह नéव भारी दबाव म¤ है । पूरी दुिनया म¤ Modern agriculture मु´य łप से fossil fuels, global supply chains और ecological services से जुड़ी है । जब अंतरराÕůीय Öतर पर युĦ या कोई संकट आता है, तो Energy या fertilizer markets म¤ होने वाला 'disruption' हमारे 'food systems' को बुरी तरह झकझोर देता है । जब ये वैिĵक किड़यां टूटती ह§, तो सबसे पहले हमारे गरीब िकसान कì आजीिवका और देशवािसयŌ का ÖवाÖÃय ÿभािवत होता है । हम युĦŌ और 'energy markets' को तो िनयंिýत नहé कर सकते, लेिकन हम अपना भोजन कैसे उगाते ह§, उसे ज़łर 'redesign' कर सकते ह§ । आज भारतीय कृिष एक 'high-cost, low-return cycle' म¤ फंस गई है, जो पूरी तरह से chemical fertilizers, pesticides और proprietary seeds जैसे बाहरी 'inputs' Ĭारा संचािलत है । उदाहरण देिखए महोदय चावल कì खेती के िलए एक िकसान रासायिनक इनपुट पर औसतन ₹5,961 ÿित एकड़ खचª करता है, जबिक 'Zero Budget Natural Farming' करने 18.03.2026 1510 वाले िकसान का खचª माý ₹846 ÿित एकड़ आता है । भारत के 85% से अिधक िकसान small and marginal ह§, जो बढ़ते input prices और 'climate shocks' से सबसे ºयादा टूट जाते ह§ । ÿाकृितक खेती उÆह¤ इस जाल से िनकालती है और 'market-purchased inputs' व 'credit' (कजª) पर िनभªरता घटाकर उनके िलए खेती के 'entry barriers' को कम करती है । ÿाकृितक खेती के पीछे ठोस वै²ािनक आंकड़े ह§ । 29 राºयŌ के 620 िजलŌ से िलए गए 2.54 लाख soil samples के िवĴेषण पर आधाåरत ICAR study यह सािबत करती है िक unscientific fertilizer का उपयोग और 'climate change' भारत कì कृिष योμय िमĘी से 'organic carbon' को पूरी तरह नĶ कर रहे ह§ । नीित आयोग के अनुसार, ÿाकृितक खेती paid-out cost (लागत) को 5-10% और कई मामलŌ म¤ 20-55% तक कम कर देती है । Diversified natural farms पारंपåरक मोनोøॉप फामŎ कì तुलना म¤ 20-40% अिधक 'net incomes' कमाते ह§ । यह Greenhouse gas (GHG) emissions को 55-85% तक कम करती है और पानी व िबजली म¤ 50-60% कì भारी बचत करती है । यह Soil Organic Carbon (SOC) को 45% तक बढ़ाता है और फायदेमंद 'soil microorganisms' को पनपने देता है, िजससे 'root development' मजबूत होता है । हमारी सरकार इस िदशा म¤ ऐितहािसक कदम उठा रही है । National Mission on Natural Farming (NMNF) के तहत 1 करोड़ िकसानŌ को ÿाकृितक खेती से जोड़ने के िलए ₹2,481 करोड़ कì पहल कì गई है, िजसम¤ 10,000 Bio-Input Resource Centres (BRCs) Öथािपत िकए जा रहे ह§ । 2025-26 म¤ इसके िलए ₹54,318.18 करोड़ िवतåरत िकए गए ह§ । आज पूरे देश म¤ 11,86,382 रिजÖटडª िकसान 9,56,489.03 हे³टेयर ज़मीन पर यह खेती कर रहे ह§ और 4,72,646 सिटªिफकेट जारी िकए जा चुके ह§ । 18.03.2026 1511 2026-27 के िलए, भारत सरकार का कुल उवªरक सिÊसडी का अनुमान लगभग ₹1.71 लाख करोड़ है (िजसम¤ यूåरया के िलए ₹1.17 लाख करोड़ और P&K उवªरकŌ पर NBS के िलए ₹540 billion शािमल ह§) । यह भारी-भरकम 'fertiliser subsidy' हमारे कुल क¤þीय बजट का 3.2% है! ÿाकृितक खेती को बढ़ावा देने से इस 'subsidy expenditure' को धीरे-धीरे 'rationalise' िकया जा सकेगा । हम¤ अपना 'support' रसायनŌ से हटाकर ²ान, training, और ecosystem services कì ओर मोड़ना होगा । भारत को इस एज¤डे को 'strategically' phase करना चािहए । R&D, extension, 'assured markets', और transition finance के साथ ही हम िकसानŌ पर िबना कोई अचानक जोिखम डाले इसे 'organically scale' कर सकते ह§ । तभी हमारे 'food systems' अिधक 'resilient' (लचीले) बन¤गे । E. Suggestions and Recommendations इन उपलिÊधयŌ के साथ-साथ, म§ सदन और सरकार के सामने िकसानŌ के िहत म¤ कुछ अÂयंत महÂवपूणª सुझाव और मांग¤ रखना चाहता हóँ । 1. भारत को healthcare म¤ आÂमिनभªर बनाने और िकसानŌ कì आय बढ़ाने के िलए, सरकार को तुरंत high-value medicinal crops कì research और management के िलए एक dedicated 'Regulatory Board' बनाना चािहए । वतªमान म¤, भारत अपने Active Pharmaceutical Ingredients (APIs) का लगभग 70% िहÖसा import करता है । यह हमारी healthcare supply chain के िलए एक बहòत बड़ी कमजोरी है । अगर सरकार Opium, medicinal hemp और अÆय high-yield medicinal plants कì ÓयविÖथत łप से पहचान, research और regulation करे, तो हम अपने इस भारी import burden को काफì हद तक कम कर सकते ह§ । यह ÿÖतािवत Board इन फसलŌ कì खेती के िलए कड़े safety protocols बनाएगा, global compliance के िहसाब से quality को standardize करेगा, और एक सुरि±त 18.03.2026 1512 legal framework तैयार करेगा । पारंपåरक खेती के बजाय इन highly lucrative और regulated crops कì खेती करने से िकसानŌ के profit margins कई गुना बढ़ जाएंगे, जो उनकì आय बढ़ाने का एक बहòत practical solution है । मेरा सरकार से आúह है िक िकसानŌ को global pharmaceutical supply chain से जोड़ने और 'आÂमिनभªर भारत' का लàय हािसल करने के िलए जÐद से जÐद इस Board का गठन िकया जाए । 2. Post-Harvest Losses पर िनयंýणः िवशेष łप से फलŌ और सिÊजयŌ कì बबाªदी रोकने के िलए हम¤ गांव-गांव म¤ Cold Storage Facilities और Food Processing Units का जाल िबछाना होगा । इससे शेÐफ लाइफ (shelf life) बढ़ेगी और िकसान अपनी उपज का सही मूÐय तय कर पाएगा । 3. पराली का औīोिगक उपयोगः फसल अवशेषŌ को जलाने के बजाय, 'Agro-Based Industries' Öथािपत कì जानी चािहए । पराली और धान के कचरे से ईंट भĘŌ (brick kilns) के िलए 'palates' (पेलेट्स) बनाए जा सकते ह§ । इससे कोयले और लकड़ी पर िनभªरता घटेगी और िकसान को कचरे के भी दाम िमल¤गे । 4. आधुिनक तकनीक और AI: िकसानŌ को 'AI-Based Agro Advisory Services' दी जानी चािहए, तािक उÆह¤ real-time मौसम, बाज़ार के 'trends' और सवō°म कृिष िविधयŌ कì जानकारी िमले । साथ ही precision agriculture, drones, और satellite imaging को बढ़ावा िदया जाना चािहए । 5. सुर±ा और बाज़ार िलंकेजः मूÐय म¤ उतार-चढ़ाव और मौसम कì मार से बचाने के िलए 'Crop Insurance Schemes' को और अिधक Óयापक बनाया जाए । िबचौिलयŌ को खÂम कर 'direct market linkages' Öथािपत िकए जाएं । F. Conclusion अंत म¤ म§ बस इतना ही कहना चाहóंगा िक हमारी सरकार कì नीितयां, यह बजट और ÿाकृितक खेती पर हमारा बढ़ता 'focus' कोई साधारण कदम नहé है । यह एक महाय² है । इसका 18.03.2026 1513 वाÖतिवक ÿभाव इस बात पर िनभªर करेगा िक हमारी cold storage, processing infrastructure, assured markets, और इन नीितयŌ का implementation ज़मीनी Öतर पर अंितम छोटे िकसान तक िकतनी तेज़ी से पहòंचता है । यिद हम इन सभी संकÐपŌ को शत-ÿितशत िसĦ कर लेते ह§, तो हम िकसानी पåरवारŌ और मछली पकड़ने वाले समुदायŌ को केवल 'growth' ही नहé, बिÐक 'security', 'dignity', और 'better incomes' दे पाएंगे, िजसके वे दशकŌ से असली हकदार ह§ । जब गांव का िकसान समृĦ होगा, तभी यह देश स¸चे अथŎ म¤ 'िवकिसत भारत' के संकÐप को पूरा कर पाएगा । िकसान के िबना इस राÕů कì कोई गित नहé है । अंत म¤, म§ भारत के उन पसीने से भीगे, तपती दोपहरी और कड़कड़ाती ठंड म¤ खेत म¤ डटे अपने अÆनदाताओं को नमन करते हòए, एक बेहद ओजÖवी बात के साथ अपना भाषण समाĮ करना चाहóँगा । िजसके हल कì धार से, ये बंजर ज़मीन भी मुÖकुराती है, िजसके पसीने कì बूंदŌ से, ये सूखी माटी भी लहलहाती है । उसी अÆनदाता के Âयाग से बनी है, हमारे 'नए भारत' कì तÖवीर, उसी के फौलादी कंधŌ पर िटकì है, इस 'नए भारत' कì तकदीर । इÆहé शÊदŌ के साथ म§ इन अनुदान मांगŌ का पूणªतः समथªन करता हóँ । बहòत-बहòत धÆयवाद । जय िहंद, जय िकसान । ®ीमती संजना जाटव (भरतपुर) : सभापित महोदया, आपका बहòत-बहòत धÆयवाद िक आपने मुझे कृिष एवं िकसान कÐयाण मंýालय कì वषª 2026-27 कì अनुदान कì मांगŌ पर चचाª करने कì अनुमित दी है । सभापित महोदया, म§ कहना चाहती हóं िक सरकार िकसानŌ को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेिकन बजट के आंकड़े कुछ और कहानी बताते ह§ । सभापित महोदया, म§ िकसान के पåरवार कì बेटी हóं और िकसानŌ कì परेशािनयŌ को बहòत 18.03.2026 1514 अ¸छी तरह से समझती हóं । सभापित महोदया, मेरे संसदीय ±ेý के िकसानŌ कì ÿमुख समÖया पानी है, ³यŌिक िसंचाई कì पयाªÈत ÓयवÖथा नहé होने के कारण और बाåरश कम और समय पर न होने से फसल¤ ÿभािवत होती ह§ । इसिलए, जल ąोतŌ के संर±ण और नहरŌ के आधुिनकìकरण कì अÂयंत आवÔयकता है । सरकार को िसंचाई पåरयाजनाओं म¤ बड़ा िनवेश करना चािहए । आज खेती म¤ बढ़ती लागत जैसे खाद, बीज और मजदूरी कì बढ़ती कìमतŌ के कारण िकसान बहòत परेशान है । िकसानŌ कì आय ÿित वषª घटती जा रही है । िकसानŌ कì लागत कम करने और िकसानŌ कì आय बढ़ाने के िलए ठोस कदम उठाने चािहए । फलŌ और सिÊजयŌ कì बबाªदी रोकने के िलए Êलॉक Öतर पर कोÐड Öटोरेज और आधुिनकì गोदाम बनाने के िलए अितåर³त बजट िदया जाए । म§ िकसानŌ के िहत म¤ मेरे संसदीय ±ेý भरतपुर म¤ फूड ÿोसेिसंग यूिनट कì Öथापना कì मांग करती हóं । 16.07 hrs (Kumari Selja in the Chair) मैडम, अंत म¤ म§ मांग करती हóं िक आज देश का िकसान बढ़ती लागत, जलवायु संकट, कजª के दवाब से जूझ रहा है । मेरी सरकार से मांग है िक Æयूनतम समथªन मूÐय को कानूनी गारंटी दी जाए । पीएम िकसान सÌमान कì रािश 6 हजार Łपये से बढ़ाकर कम से कम 12 हजार Łपये कì जाए । िकसान अनुसंधान एवं िसंचाई ढांचे म¤ बड़ा िनवेश िकया जा रहा है । फसल बीमा योजना को िकसान िहत और पारदशê बनाया जाए । िकसान केवल आिथªक łप के ±ेý म¤ ही नहé, बिÐक भारत कì खाī सुर±ा और úामीण अथªÓयवÖथा कì रीड़ कì हड्डी है । इसिलए म§ कहना चाहती हóं िक इस बजट म¤ वाÖतिवकता और िनवेश को बढ़ाकर िकसानŌ के जीवन म¤ ठोस पåरवतªन िकया जाना चािहए । … (Óयवधान) मैडम, म§ अपनी बात कƳलूड कर रही हóं । म§ दो बातŌ को शेयर करके कƳलूड करना चाहóंगी । “कागजŌ म¤ नहé हकìकत म¤ सुधार करना चािहए, 18.03.2026 1515 िकसानŌ को िसफª वादे नहé, अिधकार देना चािहए, जो िमĘी से सोना उगाता है, हर बार उसे भी जीने का पूरा सÌमान िदया जाना चािहए ।” जय जवान, जय िकसान, जय संिवधान, जय भीम, जय भारत । डॉ. राजकुमार सांगवान (बागपत) : सभापित महोदया, आपने मुझे कृिष एवं िकसान कÐयाण मंýालय कì अनुदान कì मांगŌ पर इस सदन म¤ अपनी बात रखने का अवसर िदया, इसके िलए म§ आपको धÆयवाद देता हóं । सभापित महोदया, यह मंýालय हमारे देश के करोड़Ō िकसानŌ के जीवन से सीधे जुड़ा हòआ है । मंýालय मु´य łप से दो िवभागŌ के माÅयम से कायª करता है-कृिष एवं िकसान कÐयाण िवभाग तथा कृिष अनुसंधान एवं िश±ा िवभाग । कृिष एवं िकसान कÐयाण िवभाग िकसानŌ के कÐयाण से संबंिधत नीितयŌ और कायªøमŌ का िøयाÆवयन करता है तथा कृिष इनपुट्स का ÿबंधन करता है, जबिक कृिष अनुसंधान एवं िश±ा िवभाग नवाचार, अनुसंधान और वै²ािनक उÆनित के माÅयम से कृिष ±ेý को सशĉ बनाता है । िव°ीय वषª 2026-27 के िलए मंýालय को 1,40,529 करोड़ Łपये का आवंटन िकया गया है, जो वषª 2025-26 के संशोिधत अनुमान कì तुलना म¤ 5.4 परस¤ट अिधक है । इस कुल बजट म¤ से 93 परस¤ट रािश कृिष एवं िकसान कÐयाण िवभाग को आवंिटत कì गई है और 7 परस¤ट रािश कृिष अनुसंधान एवं िश±ा िवभाग को दी गई है । यह ÖपĶ करता है िक सरकार िकसानŌ के ÿÂय± कÐयाण और जमीनी Öतर पर ÿभाव डालने वाले कायªøमŌ को सवō¸च ÿाथिमकता दे रही है । सभापित महोदया, वषª 2026-27 म¤ मंýालय का सबसे बड़ा आवंटन ÿधानमंýी िकसान सÌमान िनिध योजना के िलए िकया गया है । इस योजना के िलए 63,500 करोड़ Łपये िनधाªåरत िकए गए ह§, जो मंýालय के कुल बजट का लगभग 45 परस¤ट है । यह सरकार कì िकसानŌ के ÿित ÿितबĦता को ÖपĶ łप से दशाªता है । इस योजना के अंतगªत पाý भूिम धारक िकसान पåरवारŌ को ÿित वषª 6,000 Łपये कì आिथªक सहायता तीन समान िकÖतŌ म¤ ÿदान कì जाती है । यह 18.03.2026 1516 सहायता िकसानŌ को आिथªक सुर±ा ÿदान करती है और उनकì आय म¤ िÖथरता लाती है । सभापित महोदया, माननीय सदन को यह अवगत कराना चाहता हóँ िक राÕůीय कृिष िवकास योजना राºयŌ को कृिष िवकास योजनाएं तैयार करने हेतु ÿोÂसािहत करने के उĥेÔय से ÿारंभ कì गई थी । वषª 2026-27 म¤ इस योजना के िलए 8,550 करोड़ Łपये का आवंटन िकया गया है, जो िपछले वषª के संशोिधत अनुमान से 22 परस¤ट अिधक है । इस योजना के ÿमुख घटक ह§ - मृदा ÖवाÖÃय एवं उवªरता, कृिष यंýीकरण, फसल िविवधीकरण, वषाª आधाåरत ±ेý िवकास, िसंचाई । यह योजना राºयŌ को उनकì Öथानीय आवÔयकताओं के अनुसार कृिष िवकास को गित देने म¤ स±म बनाती है । सभापित महोदया, वषª 2026-27 म¤ कृिष उÆनित योजना के िलए 11,200 करोड़ Łपये का ÿावधान िकया गया है । यह एक समेिकत योजना है, िजसम¤ कई पूवª योजनाओं को शािमल िकया गया है । कृिष िवपणन योजना, राÕůीय खाī सुर±ा िमशन, राÕůीय बागवानी िमशन, कृिष जनगणना आिद । महोदय, फसल िविवधीकरण कì िदशा म¤ सरकार ने ऐसा कहा है िक िकसानŌ को तंबाकू कì खेती से हटकर अिधक लाभदायक नकदी फसलŌ कì ओर बढ़ना चािहए । इसके िलए हाइिāड म³का, िमचª, कपास, सोयाबीन, दलहन, ितलहन और मोटे अनाज जैसे िवकÐपŌ को बढ़ावा िदया गया है । इन उपायŌ का उĥेÔय िकसानŌ कì आय को िटकाऊ और मजबूत बनाना है । महोदय, िनगरानी और पारदिशªता के मामले म¤ सरकार ने कहा िक िकसी ÿकार कì अिनयिमÂता बदाªÖत नहé कì जाएगी । िडिजटल Èलेटफॉमª जैसे कृिष र±क पोटªल पर ÿाĮ िशकायतŌ कì लगातार िनगरानी कì जा रही है और गड़बड़ी करने वालŌ के िखलाफ स´त कारªवाई कì जा रही है । साथ ही, ÿÂय± लाभ अंतरण के माÅयम से फसल बीमा के हजारŌ करोड़ Łपये सीधे िकसानŌ के ब§क खातŌ म¤ पहòंचाए जा रहे ह§ । म§ इस सदन से आúह करता हóँ िक वषª 2026-27 के िलए कृिष एवं िकसान कÐयाण मंýालय कì अनुदान कì माँगŌ को Öवीकृित ÿदान कर¤ । धÆयवाद । 18.03.2026 1517
वक्ता Tangella Uday Srinivas
कब कहा
किस वाद-विवाद में Presentation of 7th and 8th reports of the Committee on the Welfare of Scheduled Castes and Scheduled Tribes
Tangella Uday SrinivasSession ls-18-s7Presentation of 7th and 8th reports of the Committee on the Welfare of Scheduled Castes and Scheduled TribesLok Sabha Proceedings