कथन
If you talk about external debts, it stood at Rs. 47,271 crore, we have brought it down to Rs. 15,000. Is it one-third reduction or not? Yet, people say that we have not not been to reduce it. आप जÐदी कƳलूड करवा रहे ह§ तो म§ दो चीज¤ आपके Åयान म¤ लाना चाहता हóं । इस बजट म¤ अपने िस³योåरटी ůेिडंग टै³स लगाया है । िस³योåरटी ůेिडंग टै³स 0.15 ÿितशत ह§ । मेरे िहसाब से अगर आप डेåरवेिटÓस माक¥ट को ढंग से देख¤गे, Éयूचर और ऑÈशंस के माÅयम से िजस ÿकार कì गितिविध हो रही है, तो वह सामाÆय Óयिĉ को ऐÈस और िडिजटल Èलेटफॉमª के माÅयम से कजªदार बनाया जा रहा है । आपको पुनिवªचार करना पड़ेगा । डेåरवेिटÓस माक¥ट गैÌबिलंग का गेम हो गया है । इसके आधार पर एक साधारण िनवेश करने वाला Óयिĉ रोज लाख Łपये खो रहा है । वे एक एक लाख करोड़ Łपये का घाटा कर चुके ह§ । म§ इसी बात को कहते हòए रामधारी िसंह िदनकर कì किवता कì एक पंिĉ सुना देता हóं, सभी माननीय सदÖयŌ ने कही है जो वह आज ÿसांिगक है । “जब िवपि° आती है कायर को ही दहलाती है, साहसी, सूरमा नहé िवचिलत होते, एक ±ण भी धीरज नहé खोते, िव¶नŌ को गले लगाते ह§ और कांटŌ म¤ राह बनाते ह§ ।” आज कì पåरŀÔय म¤ यही इसका सार है । धÆयवाद । 24.03.2026 1220 डॉ. नामदेव िकरसान (गड़िचरोली-िचमुर) : Thank you for giving me this opportunity. I am also thankful to my party leadership. आज हम फाइन¤स िबल के ऊपर चचाª कर रहे ह§। फाइन¤स िबल म¤ इस देश कì अथªÓयवÖथा वषŎ से िदखायी दे रही है, हमारे úामीण ±ेý के लोगŌ ने हमको चुन कर भेजते ह§, हम¤ उनकì अपे±ाओं पर खरा उतरनी चािहए । इस देश कì सÌपि° का िवतरण 1 परस¤ट आबादी के पास 40 ÿितशत सÌपि° है, 50 ÿितशत सबसे िनचले तबके और गरीब से गरीब लोगŌ के पास 3 से 6 ÿितशत सÌपि° है । यह असमानता बढ़ती जा रही है । इस असमानता को कम करने के िलए इस िवधेयक म¤ कोई ÿावधान िदखायी नहé देता है । 10 ÿितशत पूंजीपितयŌ के पास इस देश कì 70 ÿितशत सÌपि° है । इस असमानता को कम करने के िलए इस िबल म¤ ÿावधान होने चािहए । जीडीपी कì गणना हमारे देश म¤ होती है, उसे इंटरनेशनल मोिनटåरंग फंड ने सी úेड िदया है । जीडीपी अरबपित लोगŌ से तय होती है । जब 2024 से 2026 तक जीडीपी 6 से 7 ÿितशत हòई, कैसे हòई, यह इसिलए हòई िक अरबपितयŌ कì सं´या पहले 102 थी, वह अब 167 हो गई । इसका िहÖसा गरीब तबके को िमलना चािहए, वह नहé िमलता है । जीएसटी कर वसूलने का तरीका ÿितगामी है । 50 ÿितशत गरीब और िनचले तबके कì आबादी से 64 परस¤ट जीएसटी वसूल कì जाती है । 10 परस¤ट अमीरŌ से हम िसफª 4 ÿितशत जीएसटी वसूल करते ह§ । इस ÿितगामी कर ÿणाली म¤ बदलाव होना चािहए, यह बार-बार कहा जाता है िक िपछले 70 सालŌ म¤ कुछ नहé हòआ । महोदय, बाप-दादा ने जो कमाई करके सÌपि° जमायी है, अगर बेटे उसको बेच-बेच कर खा रहे ह§, उसके बावजूद भी बोल रहे ह§ िक उÆहŌने हमारे िलए कुछ नहé िकया । िविनवेश का िसÖटम अभी भी चालू है । इस साल का िडसइनवेÖटम¤ट का टारगेट 80 हजार करोड़ Łपये है । इसके पहले जो लàय रखा था, वह पूरा नहé हòआ । िफर से 80 हजार करोड़ Łपये का टारगेट रखा गया है । सरकारी सÌपि°यŌ को बेचने का काम सरकार को बंद कर देना चािहए । देश म¤ बढ़ती हòई महंगाई और बेरोजगारी पर इस िबल म¤ कोई भी योजना िदखायी नहé देती है। आपको पता है िक िकसानŌ 24.03.2026 1221 को फसल उगाने म¤ जो खचª आता है, उसम¤ बढोÂतरी हòई, लेिकन उनका जो Æयूनतम समथªन मूÐय है, उसम¤ बढ़ोÂतरी नहé हòई है । महाराÕů के िवदभª म¤ 4 िजलŌ म¤ धान उगाया जाता है। गढ़िचरौली, गŌिडया, भंडारा, चंþपुर व नागपुर के कुछ ±ेýŌ म¤ धान कì फसल होती है । धान, जो खरीफ कì फसल है, िजसकì खरीद सरकार ने Æयूनतम समथªन मूÐय पर कì है, उसका पूरा भुगतान अभी तक नहé िकया है । िकसानŌ कì लोन पे करने कì अंितम ितिथ 21 माचª है, वे लोन कैसे पे कर¤गे? अत: िकसानŌ को उनकì बकाया धनरािश िमलनी चािहए । अभी भी कुछ धान बचा हòआ है, जो सरकार ने परचेज नहé िकया है । धÆयवाद । एडवोकेट िÿया सरोज (मछलीशहर) : माननीय सभापित महोदय, आज फाइन¤स िबल 2026-27 पर आपने मुझे बोलने का अवसर िदया, इसके िलए म§ आपको धÆयवाद देती हóं । इस देश म¤ करोड़Ō युवा ह§, िजÆहŌने सपना देखा था अ¸छे िदनŌ का, रोज़गार का, सÖती पढ़ाई का, सÖती दवाई का, लेिकन इस बजट को देखकर लगता है िक सरकार का सपना कुछ और ही है । सरकार कह रही है िक 44 लाख करोड़ Łपये का टै³स रेवेÆयू होगा । देश का कुल कज़ª आज भी जीडीपी का करीब 55 ÿितशत है । इस कज़ª का Êयाज अकेले पूरे बजट का 26 ÿितशत खा जाता है । यानी हर 100 Łपये म¤ से 26 Łपये तो िसफª पुराने कज़ª का Êयाज चुकाने म¤ चले जाते ह§ । सरकार ने इन 12 सालŌ म¤ देश पर कज़ª का बोझ इतना बढ़ा िदया है िक जो पैसा गरीब के घर, िकसान के खेत, ब¸चे कì पढ़ाई और मज़दूर कì तन´वाह पर लगना चािहए था, वह पहले का उधार चुकाने म¤ चला जाता है । यह अमृत-काल कम और कजª-काल Ûयादा लगता है । कागज़Ō पर बजट बहòत बड़ा लगता है, लेिकन जनता के िलए जगह बहòत छोटी हैI ऊपर से बजट चमक रहा है, नीचे से घर का बटुआ फट रहा है। कागज़Ō म¤ तो सरÈलस िलखते ह§, लेिकन िज़ंदगी तो ईएमआई भरते-भरते कट रही है । कज़ª बढ़ता जा रहा है, बचत पीछे छूट रही है, कजª तो एसेट्स से भी तेज़ भाग रहा है, आम िहंदुÖतानी का भिवÕय िगरवी है । यह कैसा अमृत-काल है, जहाँ आम िहंदुÖतानी का भिवÕय िगरवी रखा जा रहा है? माननीय महोदय, वषª 2019 म¤ इस सरकार ने बड़ी कंपिनयŌ का कॉरपोरेट टै³स 30 ÿितशत से घटाकर 22 ÿितशत कर िदया । उनको हर साल 1.5 लाख करोड़ Łपये कì राहत िमली । यह 24.03.2026 1222 पैसा मÅयम वगª कì जेब से, िकसान कì जेब से, नौकरीपेशा कì सैलरी से कहाँ से åरकवर िकया जा रहा है? अब इनकम टै³स, कॉरपोरेट टै³स से Ûयादा हो गया है । यानी सैलरी पाने वाला आम इंसान, छोटा Óयापारी Ûयादा टै³स दे रहा है और बड़ी कंपिनयाँ कम । Ãयोरी यह थी िक कॉरपोरेट्स को छूट दो, वे इनवेÖट कर¤गे, जॉÊस आएंगी । 12 साल हो गए ।, जॉÊस भी नहé िमली, इनवेÖटम¤ट भी नहé हòआ, लेिकन कॉरपोरेट का मुनाफ़ा ज़łर बढ़ गया । आज भारत का आम पåरवार घर बनाने के िलए नहé, ब¸चŌ कì पढ़ाई के िलए नहé, रोटी के िलए कज़ª ले रहा है, इलाज के िलए कज़ª ले रहा है, शादी के िलए कज़ª ले रहा है और िजंदगी जीने के िलए कजª ले रहा है । जब कोई पåरवार रोटी के िलए कजª लेने पर मजबूर हो जाता है, तो इसे िवकास नहé, िवफलता कहते ह§ । मज़दूरी तो बढ़ी नहé, लेिकन महंगाई बढ़ती रही और इसी क§ची म¤ आम पåरवार कट रहा है । घरेलू बचत पाँच साल के सबसे िनचले Öतर पर है । ये आंकड़े चीख-चीखकर बोल रहे ह§, लेिकन सरकार के कान बंद है, आँख¤ बंद ह§ और मुँह यिद खुलता है, तो केवल 'िवकिसत भारत' बोलने के िलए खुलता है । महोदय, म§ बताना चाहती हóं िक जनता को करीब 14 ÿितशत मेिडकल महंगाई सहनी पड़ती है, जो सरकारी चाटª म¤ नहé िदखाई जाती है । करीब 12 ÿितशत िश±ा कì महंगाई झेलनी पड़ती है, जो सरकारी आंकड़Ō म¤ शािमल नहé कì जाती है । कई पåरवार आज अपनी पूरी कमाई का आधा िहÖसा िसफª एक ब¸चे कì पढ़ाई पर दे रहे ह§ । एलपीजी कì मार ने तो हर रसोई को छुआ है और छोटे ढाबे बंद हो रहे ह§, कमªचाåरयŌ कì छंटनी हो रही है । असली महंगाई वह है जो आम आदमी महसूस कराता है, जो िकसी सरकारी åरपोटª म¤ नहé िलखी होती । सभापित महोदय, उ°र ÿदेश से सबसे Ûयादा सांसद संसद म¤ आते ह§, लेिकन वहाँ कì ÿित कैिपटल इनकम आज भी राÕůीय औसत से भी कम है । इतने सालŌ से डबल इंजन सरकार तो आपकì बनी हòई है, डबल इंजन तो आपने लगा िदया, लेिकन आम आदमी से भरी ůेन खéचने के िलए इंजन म¤ दम ही नहé है । महोदय, म§ आपके माÅयम से सरकार से यह कहना चाहóँगी िक िमिडल ईÖट कì इस लड़ाई के दौरान अमेåरका ने कहा िक उÆहŌने भारत को दूसरे देशŌ से तेल लेने के िलए अलाऊ िकया । यह 24.03.2026 1223 अलाऊ िसफª एक शÊद नहé है, यह हमारी संÿभुता पर सवाल उठाता है । सबसे बड़ा सवाल यह है िक यह सरकार चुप ³यŌ रही? सरकार के ये लोग जो रोज बड़ी-बड़ी बात¤ करते ह§, वे आज िकसी दूसरे देश कì ÿेस कां¤स म¤ अलाऊ जैसा शÊद सुनकर चुप बैठे ह§ । वषª 1971 म¤ इंिदरा गांधी जी ने ÿेसीड¤ट िन³सन कì धमकì को नकारा था । अटल जी ने पोखरण के जåरए दुिनया को जवाब िदया था । आज हम अलाऊ शÊद सुन रहे ह§ और सरकार के िकसी Óयिĉ कì तरफ से इस पर कोई ट्वीट नहé आया । म§ आपको यह कहना चाहती हóँ िक यह कैसी आÂमिनभªर सरकार है, यह कैसा देश है, मगर अब म§ यह कहना चाहóँगी िक िचप भी िवदेश कì है, ए.आई. भी िवदेश का है, तेल भी िवदेश का है और ऊपर से इजाजत भी हम¤ अमेåरका दे । यह कैसा आÂमिनभªर हम बन रहे ह§? वेवर लेकर भी खुद को μलोबल लीडर बताते ह§, यह सबसे बड़ी िवडÌबना है । जब अपना Éयूल भी दूसरे के लाइस¤स से िमले तो देश कì संÿभुता पर सीधा सवाल उठता है ।
वक्ता Rao Rajendra Singh
कब कहा
किस वाद-विवाद में Ruling regarding Notices of Adjournment Motion
Rao Rajendra SinghSession ls-18-s7Ruling regarding Notices of Adjournment MotionLok Sabha Proceedings