Statement
MGNREGA is not just another scheme, it is the primary fallback for the poorest households when agriculture fails and markets disappear. … (Interruptions) Sir, I am just concluding with two sentences. Instead of strengthening the law, ensuring timely payments and restoring trust, the Government has systematically weakened MGNREGA through under-funding, delays and exclusions. Having hallowed it out in practice, it now seeks to abolish it in the law. I want to end with two lines. ‘एक ही िदन म¤ सब नहé हòआ खÂम, हम कई रोज से िबछड़ रहे थे ।’ Sir, this law, if passed, would be killing MGNREGA in its entirety. Thank 17.12.2025 1272 you so much. ®ी पी. पी. चौधरी (पाली) : सभापित महोदय, धÆयवाद । सभापित महोदय, म§ िवकिसत भारत - जी राम जी िवधेयक, 2025 के समथªन म¤ बोलने के िलए खड़ा हòआ हóं । यह िवधेयक संरचनाÂक पुनगªठन और िवकिसत भारत, 2047 के अनुłप है । जब मोदी सरकार ने सÂता संभाली थी, तो उसे केवल यह कÐयाणकारी योजना नहé िमली थी, बिÐक एक ऐसी ÓयवÖथा िवरासत म¤ िमली थी, जो åरसाव, भुगतान म¤ देरी और िवकृितयŌ से úÖत थी । मोदी जी के सामने चुनौती रोजगार गारंटी कì अवधारणा को Âयागने कì नहé थी, बिÐक उसे सुधारने, आधुिनक बनाने और भारत कì बदली हòई úामीण अथªÓयवÖथा के अनुłप ढालने कì थी । सभापित महोदय, वषª 2013 म¤ जब सीएजी कì åरपोटª आई थी, तो उसम¤ साफ िलखा हòआ था, म§ बहòत संि±Èत म¤ बताना चाहóंगा िक जॉब काडª जारी करने म¤ हमेशा देरी होती थी, एक ही Óयिĉ को कई जॉब काड्ªस िमलते थे, मजदूरी का भुगतान गरीबŌ को नहé होना, ÿबंधन सूचना ÿणाली (एमआईएस) म¤ आंकड़Ō कì िवसंगितयां और धन का दुŁपयोग, ये सारी चीज¤ हòई थé । यही नहé, ये जब धन कì बात करते ह§? इनके Ĭारा धन के उपयोग के बारे म¤ म§ कहना चाहóंगा िक एक तरफ मजदूरŌ को भुगतान नहé करना और न ही उसका उपयोग हòआ । यूपीए सरकार कì अ±मता का ÿमाण धन के अ±म उपयोग म¤ ÖपÕट łप से िदखाई देता है । वषª 2006-07 म¤ अÿयुĉ शेष रािश 3,250 करोड़ Łपए थी, जो उपलÊध कुल धन का 26.92 परस¤ट थी । इस रािश का गरीबŌ को भुगतान होना था, लेिकन इÆहŌने उस समय भुगतान नहé िकया । यह अपयुª³त रािश वषª 2012-13 म¤ बढ़कर 13,715 करोड़ Łपए हो गई, जो कुल उपलÊध धन का 32.2 परस¤ट थी । यूपीए शासन के अंत तक उनकì ÿमुख योजनाओं के िलए आवंिटत कुल धन का लगभग एक-ितहाई खचª ही नहé हòआ । खचª कैसे होता? इÆहŌने गरीबŌ को मजदूरी ही नहé दी । सभापित महोदय, म§ बताना चाहóंगा िक वषª 2005 म¤ योजना कì शुŁआत से अब तक सरकार ने मनरेगा पर 17 लाख करोड़ Łपए खचª िकए ह§ । लेिकन, एनएसएस, 2009-10 के आंकड़Ō के 17.12.2025 1273 अनुसार इस रािश का केवल एक-पांचवां िहÖसा - 3,40,000 करोड़ Łपए ही मजदूरी के łप म¤ वाÖतिवक लाभािथªयŌ तक पहòंचा । 17,00,000 करोड़ Łपए सरकार के खजाने के उठ गए, लेिकन, मजदूरŌ को केवल 3,40,000 करोड़ Łपए ही पहòंचे । इसीिलए, मजदूर िचÐलाते थे िक उनको यूपीए - कांúेस सरकार म¤ मनरेगा का पैसा नहé िमल रहा है । शेष रािश कहां गई? राजनेताओं, नौकरशाहŌ और िबचौिलयŌ के Ĭारा हड़प ली गई । यह न केवल इस योजना के िøयाÆवयन म¤ ÓयाÈत ĂÕटाचार को उजागर करता है, बिÐक यूपीए नेतृÂव कì ĂÕट ÿवृि°यŌ का भी ÿमाण है । सभापित महोदय, गांधी जी ने कभी नहé सोचा था िक ये मेरे नाम पर कानून रख¤गे और लूटमार कर¤गे और ĂÕटाचार कर¤गे । ये तो मोदी जी आए ह§, िजनके कारण डायरे³ट बेिनिफट ůांसफर के माÅयम से पैसा सीधे गरीबŌ के खातŌ म¤ पहòंचता है । म§ राजीव गांधी जी को धÆयवाद दूंगा िक उÆहŌने पिÊलकली यह Öवीकार िकया िक जो रािश भारत कì ितजोरी से गरीबŌ के िलए जाती है, उसम¤ से 15 परस¤ट उन तक पहòंचती है, 85 परस¤ट रािश बीच म¤ लोग खा जाते ह§ । अगर डायरे³ट बेिनिफट ůांसफर का काम सही मायनŌ म¤ िकया है, तो वह मोदी जी ने िकया है । यूपीए सरकार ने मनरेगा को कैसे कमजोर िकया, आप देिखए । वषª 2010–11 म¤ मनरेगा का जो 40,000 करोड़ Łपये का बजट था, उसे घटाकर 2012–13 म¤ 33,000 करोड़ Łपये कर िदया गया, ³यŌिक उÆह¤ समझ म¤ आ गया था िक मनरेगा के Öवयं के िवचारक भी इसके िøयाÆवयन से असंतुĶ थे । राÕůीय सुर±ा पåरषद के सदÖय और मनरेगा कì अवधारणा से जुड़े जीन þेज ने भी Öवीकार िकया िक राजनीितक ÿितबĦता कì कमी है और यूपीए सरकार को मनरेगा से कोई चुनावी लाभ नहé िदख रहा था, इसिलए उÆहŌने रािश कम कì । महोदय, जब मोदी सरकार ने स°ा संभाली, तो उसे कोई ÿभावी सामािजक सुर±ा तंý िवरासत म¤ नहé िमला, बिÐक एक ऐसी ÓयवÖथा िमली, िजसम¤ िवĵास कì कमी और जो åरसाव तथा कमजोर िवÔवसनीयता से úÖत थी । हमारे सामने वैचाåरक चुनौती नहé थी, बिÐक ÿशासिनक और संरचनाÂमक चुनौती थी । पहला कदम पारदिशªता और भरोसे कì बहाली था । माननीय ÿधान मंýी ®ी नर¤þ मोदी जी के दूरदशê नेतृÂव म¤ तकनीक का उपयोग कर मनरेगा को पुनजêिवत िकया गया, 17.12.2025 1274 अÆयथा मनरेगा वहé समाĮ हो जाती । तकनीक म¤ सुधार करके आधार आधाåरत ÿणाली लागू कì गई और लगभग 13 करोड़ लोगŌ को इसम¤ सिÌमिलत िकया गया । यही नहé, नेशनल मोबाइल मॉिनटåरंग सिवªस, जीआईएस आधाåरत योजना, तकनीक ने åरसाव रोकने, िवतरण के सुधार म¤ मदद कì, लेिकन वह गहरी संरचनाÂमक खािमयŌ को दूर नहé कर सकती । ÿधान मंýी नर¤þ मोदी जी के नेतृÂव म¤ एनडीए सरकार केवल अश³तता हटाने तक सीिमत नहé, बिÐक úामीण गरीबŌ के िहत म¤ नीित को ÿभावी बनाने के िलए संरचनाÂमक सुधार करने के िलए भी सकंÐपबĦ है । महोदय, इस योजना से दो लोगŌ को ÖपÕट फायदा है । एक तरफ िकसान ह§ और दूसरी तरफ मजदूर ह§ । म§ आपको उनकì मजदूरी बताऊँगा । म§ úामीण पåरवेश से आता हóँ । म§ खुद िकसान हóँ और म§ने बैलŌ कì जोड़ी से खेती कì है । हमने वह समय भी देखा है । जब आज हम गाँवŌ म¤ जाते ह§, तो िकसान कहता है िक जो इसका िसÖटम है, उससे हम¤ लेबर नहé िमलती और कृिष बबाªद हो चुकì है । म§ कहना चाहóँगा िक अब योजना के अंतगªत कायŎ के दायरे का िवÖतार हòआ है । जो जन सुर±ा, úामीण मूलभूत कनेि³टिवटी, आजीिवका-समथªक और अवसंरचना, जलवायु अनुकूल एवं सहनशीलता पåरयोजनाओं का िवÖतार हòआ है । इस योजना के तहत कुल 60 िदन का ÿावधान है । म§ आपके माÅयम से सरकार से िनवेदन कłँगा िक इसे 90 िदन िकया जाए, ³यŌिक खरीफ और रबी कì दो फसल¤ ह§ । इनम¤ जुताई और बुवाई का काम होता है, िफर िनराई-गुड़ाई का काम होता है, उसके बाद फसल कटाई का काम होता है । इसम¤ 15-15 िदन चािहए होते ह§, तो 45 िदन हो गए । दूसरी फसल के िलए भी 45 िदन चािहए । इसिलए यिद इसम¤ 90 िदन का ÿावधान िकया जाता है, तो इससे सीधा फायदा मजदूर को होगा । वह कृिष कì मजदूरी भी कर लेगा और नरेगा कì 125 िदन कì मजदूरी भी उसे िमल जाएगी । इससे उसे बहòत बड़ा लाभ होगा । … (Óयवधान) सर, म§ अपनी बात अभी समाĮ करता हóँ । मेरी पाटê का समय भी है । मुझे कहा गया है िक आपको 15 िमनट बोलना है, लेिकन आप दस िमनट कर दीिजए ।
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